सभी कचड़ा ब्लोगर साथियों, टिप्पणीकर्ताओं को आगाह किया जाता है

आजकल धार्मिक कट्टरता सम्बंधित ब्लॉग पोस्ट और धार्मिक ज्ञान बखान कुछ ज्यादा ही हो रहा ही. सभी कचड़ा ब्लोगर साथियों, टिप्पणीकर्ताओं को आगाह किया जाता है की वे इस धर्म-निरपेक्ष देश में कायदे में रह कर ब्लोगरी करें. मैं कभी भी घटिया लेखकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकता हूँ.

ऐसे मुद्दों पर पहले भी कहा हूँ, आज फिर दोहरा रहा हूँ. “दुनिया में हरेक व्यक्ति को सबकी आस्था का सम्मान करना सीखना पड़ेगा. कोई चाहे आस्तिक हो नास्तिक हो इस्लामिक हो या गैर इस्लामिक हो. सभी नागरिक होते हैं और सबमे प्रतिभा और पोटेंशिअल होता है.”

मेरे विचार में, मैं भी अच्छा धार्मिक बखान कर सकता हूँ – एक नमूना पढ़ लीजिये…

मैं(“सिर्फ मानवीय मूल्यों में आस्था रखने वाला”) ही इश्वर हूँ और प्रत्येक बुद्धिप्राप्त प्राणी इश्वर है. इस सृष्टि में दो ही चीज़ है… जान और बेजान (Living thing & Non-living thing) मनुष्य पिछले हज़ारो/अनगिनत सदियों से अपनी बुद्धि और चेतना का निरंतर प्रयोग करते हुए आज सूचना युग में विचरण कर रहा है. मैं चाहूँ तो वैदिक काल के ऋषि या इसा पूर्व महात्मा बुद्ध या इशु या मोहम्मद या जैनगुरु महावीर की तरह किसी नए धर्म/पंथ का ईजाद कर सकता हूँ और फुर्सत की उम्र रही तो महाकाव्य(पवित्र किताब धर्मग्रंथ holi-book ) भी रच सकता हूँ और भक्तों/अंध-भक्तों (अनुयायियों) की फ़ौज मिले तो दुनिया भर में ईश्वरीय सत्ता को नए तरीके से स्थापित कर सकता हूँ.

लेकिन ऐसा कर के क्या होगा क्या पृथ्वी पर मानव समुदाय का सचमुच कल्याण हो जायेगा. शायद नहीं! होगा सिर्फ इतना की आने वाले शताब्दियों में एक और युग-पुरुष/धर्मगुरु/पैगम्बर इत्यादि के रूप में सुलभ और उसके द्वारा बनाए गए इश्वर (I-S-H-W-A-R या G-O-D या A-L-L-A-H या #-#-#) को धर्म-निरपेक्ष समाज/राज में एक पंथ/धर्म के रूप में मान्यता मिल जायेगी (क्यूंकि तबतक दुनिया के कुछ प्रतिशत आबादी इसके अनुयायी रहेंगे और मानवीयता का तकाजा है सर्व:धर्म:समभाव सबकी आस्था का सम्मान होगा). लेकिन क्या मानव समुदाय सच्चा मानव बन पायेगा. शायद नहीं. स्थिति आज की तरह या इससे भी त्रासद होगी… तभी तो एक सच्चा मानव (धार्मिक/नास्तिक/आस्तिक मानव) ऐसा दुःख देखकर इस पृथ्वी से अल्पायु में ही विदा हो गया जिनको हम “स्वामी विवेकानंद” नाम से जानते हैं.

हर विवेकशील प्राणी का दिल ही जानता है की वो क्यूँ ऐसा स्वयं पर विश्वास करता है या क्यूँ ऐसा तर्क औरों को देता है. मेरा मानना है, एक उम्र के बाद सबको ब्रह्मज्ञान (स्वयं ज्ञान या सृष्टि-ज्ञान ) हो जाता है. अत: शान्ति बनाए रक्खे. मैं ज्ञान के तलाश में हूँ…. इसके लिए मुझे किसी अन्य के मंतव्यों/वक्तव्यों (वेद गीता पवित्र कुराने-करीम) की जरुरत नहीं होगी. ऐसा मेरा विश्वास है.

हज़रत मुहम्मद (सल्लललाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया है कि…किसी भी मुसलमान के नज़दीक सबसे बड़ा गुनाह किसी के दिल को ठेस पहुंचाना है…

अब ये बताने की जरुरत नहीं है की ठेस कब कब कैसे लगता है.

बेहतर होगा लेखक अपनी ऊर्जा राष्ट्र के नवनिर्माण में लगाएं, राष्ट्र आज बारूद के ढेर पे है. वेद कुरआन को तार्किक बहस का मुद्दा न बनाकर, राष्ट्र हित में चिंतन करें. अपने आस पास युवाओं में वैश्विक और तकनिकी शिक्षा का प्रसार करें. केवल संस्कृति, तहजीब और उचित मानवीय व्यवहार एवं चारित्रिक गुणों को पुष्ट करने के लिए “वेद, कुरआन आदि” का सन्दर्भ लेना श्रेयष्कर रहेगा. न की यह कहना की यही सही है और अंतिम है.

शुभ भाव



Note: CYBER LAW IS ACTIVE IN INDIA. SO BE CAREFULL.

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27 Responses

  1. Nice post……….”

  2. Ek sammaniya lekh likha hai aapne. Kash unpar ye asar ho ki kisi bhi dharm ka majak udana band karde.

  3. “जो आज बारूद के ढेर पे है. वेद कुरआन को तार्किक बहस का मुद्दा न बनाकर, राष्ट्र हित में चिंतन करें.”

    आपका कथन बिल्कुल सत्य है किन्तु यह भी सही है किः

    फूलहिं फलहिं न बेंत जदपि गरल बरसहिं सुधा।
    मूरख हृदय न चेत जो गुरु मिलहिं बिरंचि सम॥

  4. वाह !!
    ये सही बात कही है…जितने भी तथाकथित धर्म के ठेकेदार हैं सबको कानून की चक्करघिन्नी में उलझा देना चाहिए कि बस नाचते रह जाएँ…ऐसे कि समय ही न हो ऐसी वाहियात पोस्ट लिखने की….
    सही, सामयिक पोस्ट..अब तो अक्ल आनी चाहिए…तंग आ चुके हैं देख-देख कर…
    धन्यवाद..

  5. आपके अंदाज़ का यह अनोखापन भी पसंद आया…
    आपका धार्मिक बखान एक कड़वी सच्चाई सामने रखता है…

  6. saamyik pahal, aage badhiye, hindi blog jagat aapse judta jayega, samay lag sakta hai magar koi bhi achchhi koshish bekar nahi jaati.
    apni soch kabhi mene yun vyakt ki thi:-

    धर्म-निरपेक्षता
    इस शब्द का सार लिए,
    घूम रहा हूँ,निर्वस्त्र सा लगभग
    एक लंगोटी है बस,
    अस्मिता की सुरक्षा को,
    एक क्षीण पर्दे की तरह,
    जो नैतिकता व मर्यदा का प्रतीक है,
    इस पर्दे को मैने नही हटने दिया
    क्रुद्ध-भीड़ो और धर्म- वीरो से झूजकर,
    विभिन्न आस्था के धर्मावलंबियो
    से निपट कर
    क्योकि वोह मैरा धर्म देखना या जानना
    चाह्ते थे।
    उनमें से कुछ मुझे अभय-दान भी दे दैते,
    मगर मैने किसी को यह अधिकार नही दिया,
    अपने धर्म पर से निर्पेक्षता के पर्दे को हटने नही दिया।
    मैरा निमन्त्रन है, केवल मनुष्यो को…
    आओ! इससे पहले कि मैरी धर्म-निर्पेक्ष आत्मा,
    यह ज़ख्मो से लहू-लुहान शरीर छोड़ दे,
    इस का मर्म समझ लो;
    मगर मैरा धर्म जानने का प्रयत्न तुम भी न करना।
    मैरे निकट यह अत्यन्त निजि वस्तु है,
    उसे अन्तर्मन में ही सुरक्षित रहने दो,
    उसे प्रदर्शित मत करो!
    उसे नंगा मत करो!!
    -मन्सूर अली हाशमी

    चैनल: Blog,
    http://aatm-manthan.com

  7. काश कि उन्हें समझ आये/

  8. आप से सहमत हैं।

  9. उन गद्दारों को कौन समझाए जो जिस पत्र में खा रहे हैं उसी में छेद करने पर तुले हैं।

  10. सही और बहुत सही

  11. आज पहली बार आपको पढ़ा है. आपने बहुत साफगोई से सब कुछ लिखा है, उम्मीद है लोग ध्यान देंगे.
    निवेदन – मुझे लगता है की आपका ब्लौग Mistylook टेम्पलेट में बहुत अच्छा लगेगा. प्रीव्यू लेकर देखें.

  12. apane to dara hi diya tha, kachara lekhakon par kanuni karyavahi karne ki baat kahkar. akhir main bhi to unme se ek hun. apka paryas achchha hai. esi hi koshishen karte rahiye. koi to sudhrega.

  13. बहुत बहुत धन्यबाद ऐसे पोस्ट के लिए….
    मैंने भी अभी दो तीन दिन पहले ही एक पोस्ट लिखा था…
    चिंकी मैं धार्मिक मुद्दों पर लिखे गए पोस्ट या ब्लॉग पर आधी -अधूरी टिप्पणी नहीं करना चाहता इसलिए ऐसे सभी पोस्टों के लिए मेरा पोस्ट एक कॉमन कमेन्ट की तरह ही था…..
    मैं लिंक दे रहा हूँ…..
    ……………………………………
    http://laddoospeaks.blogspot.com/2010/03/blog-post_27.html
    धर्म के बारे में लिखने ..एवं ..टिप्पणी करने बाले.. तोता-रटंत.. के बारे में यह पोस्ट ….

  14. sacg kaha hai Sulabh ji … aaj apne desh ke yuva bark ki oorja in faaltoo baaton mein lag rahi hai … yadi sankalp le kar sab raashtr nirmaan mein jut jaayen to desh unchaaiyon ko choo lega …

  15. वाकई आज के माहौल को देखते हुए ऎसी पोस्ट की बहुत दरकार थी। यदि अब भी न चेते तो फिर निश्चित रूप से ऎसे लोगों के खिलाफ कार्यवाही होनी ही चाहिए……

  16. हा हा हा हा.. nice साहब यहाँ भी.. 😀

  17. सच में,
    ऐसी पोस्टों के बारे में पढ़-पढ़कर कोफ़्त होती है. अरे…देश में गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, बलात्कार जैसे अपराध खत्म हो गये हैं क्या? सरकार ने सबकी सुध लेनी शुरू कर दी है क्या? आतंकवाद का खौफ़ सबके दिल से चला गया है क्या? अगर ये सब हो गया हो तो ये बात की जा सकती है कि कौन सा धर्म नया है, कौन पुराना, किसने किसका धर्मस्थल हटकर अपना बनवा लिया, किस धर्म के कौन से महापुरुष दूसरे धर्म जैसे हैं…? देश की समस्याओं पर बात नहीं करेंगे और धर्म के पीछे पड़े रहेंगे हाथ धोकर. सही मुद्दा उठाया है आपने.

    • जब धर्म ही नही होगा तब यही कुछ होगा अराध्नाजी जरूरत हे सनातन पुरातन धर्म को मानने की नया धर्म क्यों बनाया जावे किसी का क्यों अपनाया जाए ,बिना किसी तर्क के किसी के धर्म को क्यों दबाया जावे ?वाहियात मुदा क्यों उड़ाया जावे ?
      सनातन के चार धर्म हिन्दू -मुस्लिम -सिख इसाई , इनको भाई-भाई क्यों ना बनाया जावे ?

  18. purposeful, wah!

  19. good post.

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  20. इक्कीसवीं सदी में आकर भी हम अभी तक कहाँ फंसे हैं ……. ज्ञान होने से ज्यादा ज़रूरी है विवेक का होना …. और ऐसे लोगों के पास ज्ञानहो सकता है, विवेक नहीं ….. अभी भी हजारों साल पीछे पीछे चल रहे हैं

    विद्या विवादाय धनं मदाय, शक्तिः परेषां परिपीडनाय
    खलस्य साधोर्विपरीतमीदम, ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय
    अर्थात-दुष्टों के लिए विद्या विवाद के लिए, धन घमंड के लिए और शक्ति परपीड़ा के लिए होती है, जबकि सज्जन पुरुषों के लिए विद्या ज्ञान के लिए, धन दान अथवा परोपकार के लिए और शक्ति औरों की रक्षा के लिए होती है …

    पूरी पोस्ट का सार इन लाइनों में है –
    बेहतर होगा लेखक अपनी ऊर्जा राष्ट्र के नवनिर्माण में लगाएं, राष्ट्र आज बारूद के ढेर पे है. वेद कुरआन को तार्किक बहस का मुद्दा न बनाकर, राष्ट्र हित में चिंतन करें. अपने आस पास युवाओं में वैश्विक और तकनिकी शिक्षा का प्रसार करें. केवल संस्कृति, तहजीब और उचित मानवीय व्यवहार एवं चारित्रिक गुणों को पुष्ट करने के लिए “वेद, कुरआन आदि” का सन्दर्भ लेना श्रेयष्कर रहेगा. न की यह कहना की यही सही है और अंतिम है.

    • पद्म सिंह जी,

      आपने यह श्लोक कोट कर बहुत अच्छा किया. बचपन से मैं इसे मानता आया हूँ.
      धन्यवाद

  21. ‘गलिच्छ सन्देश’ वालो के लिए एक अच्छा सन्देश दिया है आपने.

  22. कल करे सो आज कर सोचत है अब काहे
    धर्म सनातन मिटाय के अपनी बारी घबराए

  23. You are the most kachra bloger ,
    aapki dharam nirpeksta ne – Pakistan Diya , Bangladesh Diya , Kasmeer ki problem dee, Aatankwad diya , charch ke sadyantr diye , isai aur muslim dhamantaran diya :

    aap blog giri chhod kar so jao – jagruk nagrik

    • @Rajesh ji,
      आपने अपना कमेन्ट शायद पोस्ट को विस्तार से पढ़े या समझे बिना दे दिया.
      पहली बात, मैं एक भारतीय हिन्दू हूँ, अपनी संस्कृति और राष्ट्रवाद में विश्वास रखता हूँ. चूँकि संवैधानिक रूप से भारत सेकुलर है इसलिए सेकुलर भी हुआ.

      दूसरी बात, ये पोस्ट उस समय लिखी गयी थी जब कुछ छद्म सेकुलर, गलिच्छ मानसिकता के कुछ कट्टर मुस्लिम ब्लोगरों द्वारा लगातार वेद आदि का अपमान किया जा रहा था. उनको या उन जैसों को सही पाठ पढ़ाने के उद्देश्य से यह पोस्ट प्रतिक्रया में लगाईं गयी थी.

      जहाँ तक एक जागरूक नागरिक का सवाल है मैं स्वयं जागरूक हूँ पिछले कुछ वर्षों से जागरूकता की दिशा में नियमित कार्य भी कार्य रहा हूँ. नि:संदेह मेरा हिन्दू संस्कार महान है और मुझे भारतीय होने पर गर्व है. परन्तु आज का लोकतंत्र और बहुसंख्य हिन्दू भटका हुआ है. भ्रष्ट सत्ताधारियों ने मुस्लिम वोटबैंक और मुस्लिम तुष्टिकरण के चक्कर में हिन्दुस्तान को घायल कर दिया है.

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