टिप्पणी के बिना कोई ब्लॉग कैसे लिखे (Hasya Vyangya)

आपने जो अनुभव किया वो कह दिया
मैंने जो अनुभव किया वो कह दिया

 

एक तराजू में सबको हम तोल सकते नहीं
टिप्पणी के बदले टिप्पणी मोल सकते नहीं

खुश वो हैं जिन्होंने इसे टाइम पास लिया
घर दफ्तर समाज को मगर ख़ास लिया

तकलीफ में आज वो सिर्फ बिचारे हैं
जो फुलटाइम हिंदी ब्लॉग के सहारे हैं

जब तब अपनी खीज उतारते हैं
न चाहते हुए भी टिप्पणी मारते हैं

ऐसे ब्लॉग-सेवकों से वे गृहणियां आगे हैं
चूल्हा-चौके के साथ लोकप्रियता में भागे हैं

ब्लॉग पर इनकी लेखनी का मैं भी कायल हूँ
दर्द तो बयाँ नहीं कर पाता पर मैं घायल हूँ

छोटी छोटी कविताओं में शब्द सुन्दर पिरोती हैं
भावो के गर्म चासनी में अहसासों को डुबोती हैं

इन्हें नहीं परवाह नोबेल पुरस्कार किसे मिलती है
कोई हाय तौबा नहीं अमन चैन की बात करती हैं

क्यों न करे हम वाह वाह जब टिप्पणी सस्ती है
देखते नहीं किस तरह अपनी रचना झूम के पढ़ती हैं

आप क्यों दुखी हो भैया ये तो सदियों से चलता रहा हैं
श्रींगार रस के आगे वीर रस सदैव पानी भरता रहा है

अब अपने मुद्दे की बात कहता हूँ —

ब्लॉग लिखना सिर्फ शौक नहीं हसरतें हैं
गिनती के चार ही पाठक मेरी जरूरते हैं

एक टिप्पणी मात्र से मेरा दिल बहल जायेगा
काम का सारा बोझ वाह वाह में खो जायेगा

सतरंगी खुश है की वो कोई कलम तोड़ लेखक नहीं
हिंदी का छोटा पुजारी मगर बेरोजगार बैठक नहीं

दुखी मैं भी बहुत होता हूँ हिंदी सेवकों की दुर्दशा देखकर
बात ब्लोगर की नहीं, जो चलाते हैं घर अखबार बेचकर

त्याग दूँ ब्लोगरी,  न करूँ टिप्पणी ऐसा मन करता है
मगर व्यंग्य-ग़ज़ल के दो छंद बिना पेट कहाँ भरता है

ये है ब्लोगिस्तान, यहाँ देखो सपने सुनहरे मंजिल की
उसूल मेरा एक याद रखना “सुनो सबकी कहो दिल की” ||

शुभ दीपावली – जय हिंद !!

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ब्लोगिंग कोई खेल नहीं

[मानसिक रूप से एक स्वस्थ्य ब्लोगर होने के नाते गांधी जयंती के अवसर पर मैंने एक संकल्प लिया है – तीव्र गति से बढ़ते अपने हिंदी ब्लॉगजगत में यथासंभव गुणवत्ता वाली सामग्री ही प्रविष्ट करूँगा. कुछ भी व्यर्थ लिखने से अच्छा होगा की मैं दुसरो के सद्विचारों को प्रोत्साहित करूँ या अन्य जरुरी कार्य करूँ अथवा विश्राम करूँ. व्यक्तिगत आक्षेपों, बिना साक्ष्य के दस्तावेजी छेड़छाड़, महज भीड़ जुटाने वाली व्यर्थ की सनसनी और दूषित विचारों या कुतर्कों का मैं वाहक नहीं बनूँगा.  सरल, निर्बाध, ओजपूर्ण, ज्ञानवर्धक, साहसिक, कोमल, स्मरणीय, ऐतिहासिक, साहित्यिक, रोचक, मनोरंजक एवं सामयिक परिचर्चाओं से पटे वेबपृष्ठों व शब्दमालाओं की कड़ियाँ हिंदी ब्लॉगजगत को समृद्धि एवं विविधता प्रदान करती रहे ऐसी कामना करता हूँ. सभी नए पुराने सहयात्रियों से विनम्र अनुरोध है की स्वर्णकाल को बनाए रखने में जहाँ भी उचित समझे अपना अंशदान दें. इसी सन्दर्भ में मेरी आज की पोस्ट “ब्लोगिंग कोई खेल नहीं” प्रस्तुत है.]

जकल ब्लोगजगत  में एक ख़ास किस्म की हवा बह रही है जिसके प्रभाव में आकर कुछ ब्लोगर एक जैसी पोस्ट पर लगातार चर्चा कर रहे है…  प्रतिक्रिया में इन्नोसेंट कमेंट्स का भी  पोस्टमार्टम  किया जा रहा है… कहीं पर यह भी देखने को मिला – कुछ पुराने ब्लोग्गरों के उपलब्धियों एवं व्यवहारों का गहन विश्लेषण किया जा रहा है…

त्वरित मीडिया का हालिया इतिहास यही बताता है की इस तरह की परिचर्चाओं ने सदैव सबका ध्यान खींचा है. इन सबके पिछे कुछ मूल तत्व हैं जो अपनी जगह कायम है. मसलन हर सक्रिय ब्लोगर एक नियमित अन्तराल पर एक पोस्ट डाल देता है जिसका सभी इंतजार करते है. इनमे से अच्छे, सारगर्भित और जायकेदार पोस्टों पर प्रबुद्ध पाठक अपनी प्रतिक्रया देते हैं और सहयात्री  होने का अपना ब्लोगधर्म निभाते हैं. कुल मिलाकर ब्लॉग जगत को समृद्ध कर निरंतर दिशा दे रहे हैं. यह संतोषजनक और सुखद है.

परन्तु ये क्या?? कुछ ब्लोगर अति कर देते हैं  (शुभ भाव से लिखा है) !!

  • कोई बिना विराम के लगातार पोस्ट पे पोस्ट ठेल रहे हैं. (पेशेवर मीडियाकर्मी कर सकते हैं)  इससे सामान विषयों पर पुनरावृति लेख की संभावना ज्यादा रहती है. बेहतर होगा, पोस्ट पब्लिश करने से पहले एक सरसरी निगाह से अधिकाँश पोस्टों को देखा जाये, उचित सन्दर्भ मिलने पर अपने पोस्ट को संक्षिप्त रख लिंक किया जाये तो ब्लोगरी सुखद, सरस और प्रिय लगेगा.
  • कोई ब्लॉगर महज टिपण्णी लिखने की खानापूर्ति के लिए बारम्बार आग्रह ईमेल भेजते हैं. (देश बचाओ और जनहित मामलो में ऐसा जरुर किया जाए)
  • कोई टिप्पणियों के मार्फ़त असंगत लिंक एक्सचेंज कर रहे हैं (अनामियों या spammer को माफ़ है).
  • कुछ नौसिखिये गैरजरूरी विजेट्स और भारी भरकम तस्वीरें लगा कर अपने ब्लॉग पृष्ठों का शोषण कर रहे हैं.  यह भूलते हुए की धीमा इन्टरनेट डाटा गति वाले क्षेत्रो में पेजलोडिंग के समय  इनकी जान पे बन आती है (फोटोग्राफर आर्टिस्ट वर्ग को आजादी  है).

अपील है नए उत्साही ब्लोगरो से…  पहले देखिये, समझिये, विचारिये.. हिंदी ब्लॉगजगत के इस स्वर्णकाल(मेरा मतलब वातावरण में प्रदुषण, गैरजिम्मेदाराना व्यवहार और अराजक परिस्थितियों से पहले वाला काल से है) में ये वक़्त है पहले स्वस्थ्य व नवीन चर्चाये कर अपनी क्षमताओं को पहचानने का, गुणवत्ता तराशने का… और साथ साथ अपने यूनिक अनुभव मार्केट में शेयर करने का..  याद रखिये शब्दों के इस महासमुद्र में गहरे गोते लगाने की जरूरत है तब जाके  कुछ सहेजने लायक मोती हासिल होंगे… इन्ही मोतियों से मालाएं बनाने की जिम्मेदारी भी हमसभी को उठाने है. ताकि अगली पीढी को हिंदी ब्लॉगजगत एक विशाल धरोहर के रूप में मिले… कुछ वैसे ही जैसे हम ऋणी हैं अपने पूर्वजों द्बारा रचित ज्ञान-विज्ञान, कला-कौशल और साहित्य-संस्कारों के अक्षय भण्डार से.

…और भी कई जरूरी बातें हैं लेकिन मैं लम्बी पोस्ट लिखने के पक्ष में नहीं हूँ… इस मौके पर वासिम साहब(शायर) का एक शेर अर्ज करना चाहूँगा. खासकर नए ब्लोगरो से अपील है पसंद आये तो दिल में उतार लेना मेरे दोस्त.

“कौनसी  बात, कब और कहाँ कहनी चाहिए
ये सलीका आता हो तो हर बात सुनी जायेगी “


बहरहाल ब्लोगिंग टाइम पास  जरूर है लेकिन बहुतों के लिए ये एक खूबसूरत शौक है.
कईयों के के लिए
ब्लोगिस्तान एक मायानगरी है जहाँ उनके सपने आकार लेते हैं… ब्लोगिंग कोई खेल नहीं है; ये तो अपना गाँव चौपाल है जहाँ अभिव्यक्ति की आजादी है… कईयों के लिए एक मिशन है… एक सेवा है…

– सुलभ (10-10-2009)

Hello world!

This blog focuses on activities related to whats going on our Society and some stuffs to educate our youth.  Also I would like to provide some tips for business.

“Blogging is not only your regular diary writing and publishing tool; this is a carrier of your actual personality development. Any kind of haste may tarnish the prestige before popularization of your words “

– Sulabh Jaiswal

“ब्लॉगरी   केवल नियमित लेखन और डायरी  प्रकाशन उपस्कर नहीं है, यह आपके वास्तविक व्यक्तित्व विकास का वाहक है. किसी भी तरह की  जल्दबाजी  आपके शब्दों को लोकप्रिय बनाने से पहले आपकी प्रतिष्ठा को धूमिल कर सकते हैं “

काव्य रस के लिए – सतरंगी यादों का इंद्रजाल … Hindi Poetry of Ghazal, Hasya, Vyangya & Sansmaran

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